उत्तराखंड समान नागरिक संहिता अधिनियम सभी धर्मों में किसी भी रीति-रिवाज से होने वाले विवाह को मान्यता दी गई है, लेकिन पंजीकरण की शर्त अनिवार्य की गई है। अधिनियम लागू होने के बाद भी विवाह समारोह पूर्व की भांति परंपरागत तरीके से होते रहेंगे।
लोग पहले की तरह ही अपने धार्मिक रीति रिवाजों का प्रयोग करते रहेंगे। नियमावली में विवाह के लिए आनंद कारज (सिख समुदाय), आशीर्वाद (पारसी समुदाय), पवित्र मिलन (ईसाई समुदाय), मंगल फेरे (जैन समुदाय), निकाय (मुस्लिम समुदाय), निसुइन (यहूदी समुदाय), पकटोन (बौद्ध समुदाय) आदि समुदायों की विवाह पद्धतियों का उल्लेख किया गया है।
हालांकि यह जरूरी है कि विवाह के लिए अधिनियम में उल्लिखित बुनियादी शर्तें (उम्र, मानसिक क्षमता और जीवित जीवनसाथी का न होना आदि) पूरी की जाएंगी। इससे राज्य के लोगों की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक आजादी सुरक्षित रहती है, जबकि विवाह के मूलभूत कानूनी मानकों का भी पालन पूरा होता है।