पहाड़ों में सर्दी का असर तेज, मसूरी और नैनीताल में पर्यटकों को गर्म कपड़ों की सलाह
देहरादून: उत्तराखंड में मानसून की विदाई के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क बना हुआ है और दिन के समय धूप निकलने से लोगों को राहत मिल रही है। वहीं, सुबह और शाम के समय तापमान में गिरावट के कारण ठंड का एहसास बढ़ने लगा है। अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में मौसम का यह बदलाव सर्दियों के आगमन का संकेत माना जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ पर्यटन के लिए उत्तराखंड पहुंचने वाले यात्रियों को भी बदलते मौसम के अनुसार अपनी तैयारियां करने की जरूरत है।
मौसम के सामान्य रुझान के अनुसार, मैदानी क्षेत्रों में दिन के समय धूप निकलने से मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रह सकता है। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और आसपास के इलाकों में दिन तथा रात के तापमान में अंतर महसूस किया जा सकता है। दोपहर के समय धूप के कारण गर्माहट बनी रह सकती है, जबकि सुबह जल्दी और सूर्यास्त के बाद हल्की ठंड महसूस होने की संभावना है। ऐसे में लोगों को सुबह और रात के समय बाहर निकलते हुए मौसम का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
दूसरी ओर, मसूरी, नैनीताल, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान मैदानी इलाकों की तुलना में कम रह सकता है। ऊंचाई वाले स्थानों और चारधाम क्षेत्रों में सुबह तथा रात के समय ठंड अधिक महसूस हो सकती है। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यात्रा के दौरान गर्म जैकेट, टोपी, दस्ताने और आरामदायक जूते साथ रखना उपयोगी रहेगा। ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए यात्रियों को निकलने से पहले स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और मार्ग की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।
मौसम में बदलाव का असर दैनिक दिनचर्या पर भी पड़ने लगा है। सुबह जल्दी काम पर जाने वाले लोगों, विद्यार्थियों और बुजुर्गों को तापमान में गिरावट के दौरान विशेष ध्यान रखना चाहिए। घरों में पंखों का इस्तेमाल कम होने लगा है और लोग सुबह-शाम गर्म कपड़ों का सहारा लेने लगे हैं। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी अक्टूबर का मौसम महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने पहुंचते हैं।
हालांकि, किसी विशेष दिन बारिश न होने या तापमान में कितनी गिरावट आएगी, इसकी पुष्टि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान से ही की जानी चाहिए। फिलहाल बदलते मौसम को देखते हुए स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम की नियमित जानकारी लेते रहें और पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा की योजना परिस्थितियों के अनुसार बनाएं।