घर-घर तक पहुंचेगी ‘सरकार’, एक ही जगह पर मिलेंगे 23 विभाग – Uttarakhand Varta

उत्तराखंड सरकार और केंद्र सरकार द्वारा राज्य की जनता के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, वित्तीय सहायता और सामाजिक सुरक्षा जैसी कई योजनाएं चलाई जाती हैं. लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोगों तक ये योजनाएं पहुंच नहीं पाती. यहां तक की लोगों को जरूरी कागज जैसे राशन कार्ड, पैन कार्ड और पेंशन योजना लेने के लिए कोर्ट कचहरी और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. लेकिन, उत्तराखंड सरकार इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए अब आपके घर तक आ रही है. आज 17 दिसंबर से शुरू हो रही इस योजना के तहत तमाम सरकारी सुविधाओं की जानकारी लेने के साथ लोगों को लाभ भी मिल सकेगा.

उत्तराखंड में आज से सभी जिलों में राज्य सरकार ने ‘जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार’ अभियान की शुरुआत की है. इस योजना का लाभ लेने के लिए आप अपने जन प्रतिनिधि जिसमें पार्षद, प्रधान, विधायक या अन्य पदाधिकारी के माध्यम से भी लाभ ले सकते हैं. खास बात यह है कि हर तहसील, हर गांव तक एक दो नहीं बल्कि 23 विभाग के अधिकारी और कर्मचारी जनता को सरकारी योजना का लाभ कैसे मिलेगा? इसके बारे में जानकारी देंगे. इसमें एसडीएम, तहसीलदार और अन्य पदों पर बैठे कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहेंगे. यह अभियान उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों में कारगर साबित हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है. पंचायती राज से लेकर कृषि विभाग और समाज कल्याण के साथ-साथ राजस्व विभाग के कर्मचारी, अधिकारी गांव, कस्बों और तहसीलों में कैंप करेंगे.

इस कैंप के माध्यम से कोई भी व्यक्ति, बिजली-पानी के बिल की समस्या, पेंशन, आधार कार्ड और राशन कार्ड के साथ-साथ राजस्व से जुड़े किसी भी समस्या के बारे में न केवल जानकारी ले पाएंगे, बल्कि मौके पर ही उनका समाधान भी किया जाएगा. मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, खासकर आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में यह कैंप कारगर होंगे और मौके पर पहुंचने वाले अधिकारी इस बात का भी ध्यान रखेंगे कि अगर कोई व्यक्ति पढ़ा लिखा नहीं है, तो फार्म भरवाने से लेकर पूरी प्रक्रिया में वह खुद ही साथ रहेंगे. अलग-अलग जगह पर न्याय पंचायत भी लगाई जाएगी. न्याय पंचायत के माध्यम से किसी तरह की भी कोई भी कानूनी समस्या या पंचायती राज्य से जुड़े मामले तत्काल सुनकर उनका निपटारा करवाया जाएगा.

2017 चुनाव से पहले भाजपा इस अभियान के तहत जनता के साथ सीधे संवाद करना चाहती है. यही कारण है कि भाजपा ने इस अभियान के तहत अपने तमाम पदाधिकारी की भी ड्यूटी तय कर दी है. विधायक से लेकर प्रधान और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी इस योजना के साथ जोड़ा गया है.




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