इस बार तीस जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा में उत्तराखंड आने वाले शिवभक्तों की संख्या तीन से चार करोड़ के बीच पहुंचने का अनुमान है. लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, ऋषिकेश और नीलकंठ महादेव से गंगाजल लेकर अपने-अपने राज्यों की ओर रवाना होंगे. इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बीच व्यवस्था बनाए रखना उत्तराखंड पुलिस और जिला प्रशासन के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गया है. इसी वजह से इस बार यात्रा को पहले से अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए कई नए फैसले लिए गए हैं.
इनमें सबसे अहम फैसला दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और मसूरी मार्ग को कांवड़ियों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित करना है. प्रशासन का उद्देश्य साफ है कि श्रद्धालुओं की आस्था भी बनी रहे और आम लोगों का जीवन भी प्रभावित न हो. इसके साथ ही हादसे रोकने के लिए भी ये पहल की जा रही है.
इस बार सबसे बड़ी व्यवस्था दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी एक्सप्रेसवे को लेकर बनाई गई है. पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कांवड़िये को इस एक्सप्रेसवे पर प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा. इसके लिए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश पुलिस ने संयुक्त रणनीति तैयार की है.
भगवानपुर बॉर्डर से ही श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाएगा, ताकि एक्सप्रेसवे केवल सामान्य वाहनों, एम्बुलेंस, दमकल और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए खुला रहे. प्रशासन का मानना है कि यदि एक्सप्रेसवे पर कांवड़ियों की आवाजाही शुरू हो गई तो दिल्ली और देहरादून के बीच बनने वाला तेज यातायात पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा, जिससे देहरादून में भारी भीड़ हो जाएगी. इसका असर देहरादून की जनता पर पड़ेगा. इसलिए सीमा से ही निगरानी बढ़ाई जाएगी और हर प्रवेश बिंदु पर पुलिस बल तैनात रहेगा.
बड़ी संख्या में हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से आने वाले कई कांवड़िये हरिद्वार से जल लेने से पहले मसूरी घूमने निकल जाते हैं, जिससे मसूरी में भीड़ बढ़ जाती है. इस कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसीलिए पुलिस ने हर साल की तरफ इस बार भी मसूरी में शिवभक्तों की एंट्री पर रोक लगाई थी.
हरिद्वार पुलिस ने इस बार श्रद्धालुओं के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है. यात्रा में किसी भी प्रकार के जुगाड़ वाहन, रेट्रो साइलेंसर, नुकीले भाले, त्रिशूल, तलवार या अन्य हथियार लेकर आने पर पूरी तरह रोक रहेगी. पैदल कांवड़ की ऊंचाई छह फीट और झांकी की ऊंचाई दस फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए, ताकि बिजली की लाइनों से दुर्घटना न हो. शराब या किसी भी नशीले पदार्थ के सेवन की हालत में हरिद्वार में प्रवेश नहीं मिलेगा. प्रत्येक श्रद्धालु को अपने साथ वैध पहचान पत्र रखना अनिवार्य होगा. चलती ट्रेन की छत या अन्य असुरक्षित स्थान पर यात्रा करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.