‘नाम बदलने पर खत्म हो जाएगी पहचान’, ऋषिकेश बजरंग सेतु को लेकर तीर्थ पुरोहितों की मांग

ऋषिकेश में बनकर तैयार हो चुके बजरंग सेतु को लेकर स्थानीय लोग और हरिद्वार-ऋषिकेश के तीर्थ पुरोहितों ने सरकार से एक मांग की है. मांग बजरंग सेतु के नाम बदलने को लेकर हुई है. स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आग्रह किया है कि नए पुल का नाम बजरंग सेतु नहीं बल्कि पुराना नाम लक्ष्मण झूला पुल ही रखा जाए, क्योंकि इस पुल और भगवान लक्ष्मण का एक धार्मिक इतिहास भी है. लिहाजा, इस सेतु का नाम ना बदला जाए.

ऋषिकेश में आज स्थानीय दुकानदारों, तीर्थ पुरोहितों ने इकट्ठा होकर सरकार को ऋषिकेश में बन रहे पुल के नाम पर पुनर्विचार करने की मांग की है. हरिद्वार से गंगा सभा के पदाधिकारी उज्ज्वल पंडित भी ऋषिकेश में लक्ष्मण मंदिर के पुरोहित और अन्य लोगों से मिले. उज्ज्वल पंडित ने कहा कि लक्ष्मण झूला पुल और ऋषिकेश का एक इतिहास है. स्कंद पुराण में यह साफ कहा गया है कि ऋषिकेश ऋषि राभ्या, भगवान विष्णु और भगवान लक्ष्मण की तपस्थली रही है. पुल के पश्चिमी किनारे पर भगवान लक्ष्मण का मंदिर है जबकि इसके दूसरी ओर श्रीराम का मंदिर है. कहा जाता है कि श्रीराम स्वयं इस सुंदर स्थल पर पधारे थे.

लिहाजा, अगर सरकार इस पुल का नाम लक्ष्मण जी के नाम से ही रखती है, तो बेहतर रहेगा. देश-विदेश से यहां आने वाले लोग इस जगह को लक्ष्मण झूला के नाम से ही जानते हैं. ऋषिकेश का नाम आते ही मुंह पर सबसे पहला शब्द लक्ष्मण झूला ही आता है. लिहाजा, वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग कर रहे हैं कि सरकार इसके नाम को ना बदले.

तपोवन लक्ष्मण झूला मां गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष पुरुषोत्तम कोठारी ने कहा कि, यह बात समझ में नहीं आ रही है कि सरकार ऐसा क्यों कर रही है. जबकि, इस पूरे क्षेत्र को लोग लक्ष्मण झूला के नाम से ही जानते हैं. अगर नाम बदल गया तो भविष्य में इस क्षेत्र की पहचान भी बदल जाएगी. उन्होंने कहा कि संस्थाओं, दुकानों, धर्मशालाओं, होटलों में लक्ष्मण झूला की ही पहचान से लोग यहां पहुंचते हैं. सरकार को इस पर पुनः विचार करना चाहिए. स्थानीय निवासी देवराज ने कहा कि नाम बदलने का फैसला सही नहीं है. इस पर सरकार को विचार करना चाहिए.

बता दें कि राज्य सरकार ने ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला पुल की मियाद पूरी होने के बाद एक नया पुल का निर्माण करवाया है. कांच का बना यह पुल बेहद आकर्षित और पुराने पुल की तुलना में बेहद मजबूत भी है. इस कांच के पुल पर चलकर गंगा पार करने का अनुभव ऋषिकेश आने वाले श्रद्धालु ले सकेंगे. इसके साथ ही सेल्फी प्वाइंट और अन्य कई खास लाइटें भी इस पुल में लगाई गई हैं. जल्द ही इस पुल को आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा.




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